सच्चा मित्र भोलू ओर बादशाह कालू

एक समय की बात है दो मित्र थे,  भोलू ओर बादशाह कालू ,भोलू एक अध्यापक था । और कालू गांव के अखाड़े मैं पहलवानी करता था । कालू इतना ताकतवर था कि इलाके के  बड़े - बड़े पहलवान कालू के नाम से ही  कांपते थे ।कालू को अपनी ताकत पर बहुत नाज था ।सब उसे बादशाह कहते थे ।
भोलू ने एक दिन कालू को अपने घर खाने पर बुलाया कालू खुशी ख़ुशी उसके घर गया । दोपहर का वक़्त था खाना खाने के बाद दोनों बातें करने लगे । कालू ,ने भोलू से  कहा दोस्त भले ही तुम बुध्दि मैं बड़े हो ,लेकिन ताक़त मैं तुम मुझसे छोटे हो छोटे ही रहोगे , भोलू  ने कहा नहीं दोस्त ऐसा नहीं है अभी तक तूने मेरी ताकत देखी ही कँहा है । मैं तुमसे भी अधिक बलशाली हूँ ।
कालू को यह बात अच्छी नहीं लगी उसने भोलू को कहा , देख ज्यादा बकबक मत कर , मैं इस सौ किलो की गेंहू की बारी को यूं हवा मैं उछाल कर 10 फ़ीट दूर फेंक सकता हूँ , है तुझमे दम तो गेंहू की बारी उठा के ही बता दे ।
  भोलू ने कहा चल ठीक है मैं तेरी चुनोती स्वीकार करता हूँ ।  लेकिन मेरी एक शर्त है अगर तू मेरी भी एक चुनोती स्वीकार करेगा तो ही मैं गेंहू की बोरी को हवा मैं उछालूंगा ,भोलू ने कालू को एक कपड़े का रुमाल जितना एक टुकड़ा दिया और कहा मैं इस कपड़े के टुकड़े को 20 फ़ीट तक दीवार के पार हवा मैं उछाल सकता हूँ अगर तुम इसे दस फ़ीट भी उछाल दोगे तो ही मैं तुम्हें ताक़तवर  मानूँगा  ।
भोलू की बात सुनकर कालू जोर जोर से हंसने लगा ,इतनी सी बात ,यह  तो मैं चुटकी बजाते एक उंगुली से कर सकता हूँ  चल देख मैं कैसे करता हूँ , । पहलवान ने कपड़ा हवा मैं जोर से उछाला लेकिन वो फैल कर नीचे आ गया । भोलू ने कहा
 कालू यह तुम्हारे बस का नहीं , लगता है तुम्हारी हड्डियों में पानी भर गया है , कालू बहुत शर्मिंदा हुआ ।
 तुझमें ज्यादा दम है तो तू कर के दिखा भोलू ने कपड़े के रुमाल मैं पत्थर रखा और जोर से फेंका इस बार कपड़ा  वापिस न आया ।।

कालू बोला मित्र तुम महान हो



शिक्षा : ताकत के साथ साथ बुध्दि का उपयोग करना बहुत आवश्यक है । हमें कभी भी ताकत पर घमण्ड

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