एक बार एक हॉकी मैच चल रहा एक खिलाड़ी पंजाब रेजिमेंट की तरफ से खेल रहा था खेल अच्छा चल रहा था चारों ओर समर्थकोँ की हूटिंग चल रही थी । इस खिलाड़ी का अच्छा प्रदर्शन विपक्षी टीम के खिलाड़ियों को बर्दाश्त नहीं हुआ।
एक खिलाड़ी ने मौका मिलते उसने अपनी हॉकि स्टीक से इस खिलाड़ी को चोटिल कर दिया ।। इस खिलाड़ी के सिर पर बहुत चोट आई फिजियोथेरेपिस्ट टीम मैनेजमेंटखिलाड़ी को बाहर ले क्या विपक्षी टीम आस्वस्त थी कि अब हम जीत जाएंगे ।।अचानक चमत्कार हुआ खिलाड़ी मैदान पर वापिस लौट आया ।।उसने विपक्षी खिलाड़ी को कहा तुमने ठीक नहीं किया था ,मैं अपना बदला लेकर ही रहूंगा विपक्षी खिलाड़ी सहम गया वो सोचने लगा कंही यह मुझपर हॉकी से हमला तो नहीं कर देगा और सम्भल कर खेलने लगा ।।।। दूसरी तरफ चोटिल खिलाड़ी ने देखते ही देखते 7 गोल दाग दिए पंजाब रेजिमेंट के इस खिलाड़ी के अध्भुत प्रदर्शन से चारों ओर समर्थकों की हूटिंग शुरू हो गयी ।।यह खिलाड़ी कोई और नहीं हॉकी का जादूगर मेजर ध्यान चंद था ।।।।मैच के अंत मैं उसने विपक्षी टीम के खिलाड़ी को कहा कि अगर तुम मुझपर गलत तरीके से चोट न मारते तो शायद मैं ऐसा नहीं खेलता । मैच समाप्त हो चुक्का था खिलाड़ी अपने बर्ताब पर शर्मिंदा था ।यही मेजर इंडियन हॉकी को नए मुकाम पर ले गया ।।मेजर ध्यान चंद एकमात्र खिलाड़ी हैं जिन्होंने हॉकी मैं टीम भारत को ओलम्पिक मैं तीन स्वर्ण पदक दिलवाए थे ।। खेल दिवस भी इस महान खिलाड़ी के जन्म की याद मैं ही 29 अगस्त को मनाया जाता है ।।याद रहे मेजर ध्यान चंद का जन्म इलाहबाब प्रयागराज में 29 अगस्त 1905 मैं हुआ था । दिसम्बर 1979 मैं इनका एम्स दिल्ली मैं निधन हुआ। इनके जीवन के अनेक प्रेरक किस्से हैं ,आज भी इन्हें हॉकि का जादूगर कहा जाता है।
शिक्षा :विरोधी और विपरीत परिस्थितियों मैं ही प्रतिभा सोने के तरह निखरती है। पंखों से नहीं हौंसलो से उड़ान होती है
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धन्याबाद।
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